जल जीवन हरियाली (Jal Jeevan Hariyali )

पृथ्वी पर इंसान के लिए अगर सबसे बेहतरीन उपहार कुछ है तो वह प्राकृति से मिली हुई वस्तुएं।लेकिन बीते कुछ सालों से मनुष्य जिस प्रकार से तरक्की की आढ़ में इन प्राकृतिक स्रोतों को नुकसान पंहुचा रहा है यह तो हम सभी जानते हैं। पर अब अच्छी बात यह है की हमारी सरकारे भी प्राकृतिक को फिर से बेहतर बनाने के लिए और स्रोतों के सही इस्तेमाल के लिए कई योजनाएं ला रही हैं। ऐसी ही एक योजना बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही है। बिहार की इस योजना का नाम है, जल जीवन हरियाली योजना। इसके जरिए ना केवल प्रदेश में फिर से पेड़ लगाने की मुहिम पर काम होगा, बल्कि वर्षा के पानी से सिंचाई की व्य्वस्था की जाएगी।  


बिहार जल जीवन हरियाली योजना क्या है 

जल जीवन हरियाली योजना के जरिए बिहार सरकार वातावरण में सुधार करना चाहती है, साथ ही किसानों वर्षा के पानी के लिए जल सरंक्षण को बढ़ावा देना चाहती है। योजना के जरिए किसानों के आवेदन पर सरकार की तरफ से किसानों को 75,500 रूपए की सब्सिडी दी जाएगी। जिसके जरिए वह अपने खेतों के आस पास तालाब का निर्माण करेंगे। इसके अलावा तालाब के आस पास पेड़ लगाए जाएंगे ताकि हरियाली को बढ़ाया जा सके।


बिहार जल जीवन हरियाली योजना के उद्देश्य 

जल जीवन हरियाली योजना के माध्यम से किसानों की आय को बढ़ाना योजना के जरिए फिर से हरियाली पैदा करना ताकि प्राकृति का संतुलन ठीक हो सके। सिंचाई के लिए जल स्रोत तैयार करना। राज्य में बिजली की खपत को कम से कम करना।


जल जीवन हरियाली योजना से जुड़ी महत्वपर्ण बातें।
  • 2022 तक जल जीवन हरियाली योजना पर 24 हजार 524 करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे। 
  • मनरेगा के तहत पिछले दो वर्षों मे योजना के माध्यम से अब तक 1 करोड़ पौधे लगाए गए। 
  • योजना के माध्यम से आहर, पोखर, छोटी नदियों, पुराने कुओं को सुदृढ़ किया जाएगा। 
  • चापा कल, कुआं, सरकारीभवनों में वर्षा के पानी को स्टोर करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग की जाएगी 
  • छोटी नदियों नालों और पहाड़ी क्षेत्रों में चेकडैम का निर्माण किया जाएगा। 
  • पराली जलाने से होने वाले वाले प्रदुषण के बारे में किसानों को जागरूक किया जाएगा।

जल जीवन हरियाली योजना के लाभ 
  • खेतों के आस पास ही सिंचाई के प्रबंध हो पाएंगे। 
  • पेड़़ो को लगाने से पर्यावरण प्रदूषित होने से बचेगा। 
  • सिंचाई के लिए व्यवस्था होने से किसानों की फसल सूखे की मार नहीं झेलेगी। 
  • बिजली की खपत कम हो जाएगी। 
  • सब्सिडी के तौर पर किसानों को 75,500 रूपए दिए जाएंगे।

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